द फॉलोअप डेस्क
असम सरकार ने माइनिंग सेक्टर में बड़े तकनीकी बदलाव किये हैं, जिसका मकसद निवेश को आकर्षित करना है। इस कवायद के बीच केंद्र ने असम सरकार को माइनिंग को प्रोत्साहित करने के लिए 500 करोड़ का इंसेंटिव यानी प्रोत्साहिन राशि दी है। एक संबोधन में असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, माइनिंग के लिए राज्य में पारंपरिक रूप से संसाधनों पर आधारित ढांचे से हटकर, अब यह एक पारदर्शी, टेक्नोलॉजी-आधारित और निवेश-उन्मुख इकोसिस्टम बन रहा है। सरमा ने कहा, भारत सरकार की 'माइनिंग सेक्टर सुधार' पहल के तहत, असम ने 'पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता' (SASCI) योजना के तहत सुधार के तीनों घटकों को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। इसके साथ ही, असम भारत का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है जिसने खान मंत्रालय से वर्ष 2025-26 के लिए पूरे ₹500 करोड़ का प्रोत्साहन (इंसेंटिव) हासिल किया है।

यह उपलब्धि असम की इन क्षेत्रों में बदलाव को दर्शाती है:
-छोटे खनिजों से जुड़े सुधार
-बड़े खनिजों की खदानों को चालू करना
-राज्य माइनिंग तत्परता सूचकांक (SMRI) में सुधार

चूना पत्थर के 12 ब्लॉकों की नीलामी
सीएम ने आगे कहा, राज्य ने दीमा हसाओ में चूना पत्थर के 12 ब्लॉकों की नीलामी करके देश की सबसे बड़ी माइनिंग सुधार सफलता की कहानियों में से एक लिखी है। इन ब्लॉकों में मौजूद खनिजों का अनुमानित मूल्य लगभग 92,828 करोड़ है। असम के सुधार-उन्मुख शासन का एक बेहतरीन उदाहरण 'नॉर्थ बोरो हुंडोंग चूना पत्थर ब्लॉक (भाग-B)' है। यह ब्लॉक 'लेटर ऑफ़ इंटेंट' (आशय पत्र) जारी होने के सिर्फ़ नौ महीनों के भीतर ही चालू हो गया; जो देश में खदानों को चालू करने की सबसे तेज़ प्रक्रियाओं में से एक है। बता दें कि राज्य चूना पत्थर, कोयला, लौह अयस्क, ग्रेनाइट, क्वार्टजाइट और 'दुर्लभ पृथ्वी तत्वों' (Rare Earth Elements) के अन्वेषण कार्यों का भी कई ज़िलों में विस्तार कर रहा है। इससे असम, भारत की महत्वपूर्ण खनिज और बुनियादी ढांचा विकास की कहानी में एक उभरते हुए केंद्र के रूप में अपनी जगह बना रहा है।
